“आनंद वस्तुओं में नहीं, हममें है।”
प्रसन्नता
विचार और चिंतन
💡 मुख्य विचार एवं चिंतन
“यह उद्धरण हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी बाहरी सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर के संतोष और प्रेम में निवास करती है।”
यह उद्धरण हमें सिखाता है कि सच्ची खुशी बाहरी सुख-सुविधाओं में नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर के संतोष और प्रेम में निवास करती है।