शाहीन बागों ने भारतीय स्त्रीत्व की नई क्रांतिकारी अवधारणा रची है.

दिल्ली की जनता को डराने के लिए, प्रवेश वर्मा ने कहा था कि “शाहीन बाग के लोग घरों में घुस कर दिल्ली की बहन बेटियों के साथ बलात्कार करने वाले हैं.”

06 जनवरी को गार्गी कॉलेज में सामूहिक यौन हिंसा करने वाले लोगों के बारे में BBC समेत अनेक एजेंसियों ने पीड़िताओं और चौकीदारों के हवाले से कहा है कि वे पास में ही चल रही किसी CAA समर्थक रैली से लौट रहे थे. आरोप है कि वे धार्मिक नारे भी लगा रहे थे.

Gargi college

इन्ही प्रवेश वर्मा ने यह भी कहा था कि ‘संसद में जयश्रीराम के नारे लगाने से पाप धुल जाते हैं.’

देश भर के हजारों शाहीन बागों में, बिना किसी सुरक्षा प्रबंध के, हज़ारों लाखों की जुटान पचास से अधिक दिनों से चल रही है.

लेकिन गोदी मीडिया ने भी इन क्रांति बागों से आई एक भी ऐसी शिकायत का ज़िक्र नहीं किया है, जिसमें किसी स्त्री के साथ किसी भी तरह की बेअदबी की गई हो.

शाहीन बागों ने भारतीय स्त्रीत्व की नई क्रांतिकारी अवधारणा रची है.

“प्रवेशवर्माई” नेता हमें मुसलमान के नाम पर क्या इसलिए डराते हैं कि ख़ुद बेधड़क हो उन सभी अपराधों को अंजाम दे सकें , जिनके इल्जाम वे दूसरों पर आयद करते हैं ? भगवान के पावन नाम को ढाल बना कर.

इसी डर की बदौलत, गुंडे JNU के गर्ल्स हॉस्टल में हथियार लेकर घुस जाते हैं और पुलिस जानते हुए भी किसी को गिरफ़्तार करने की हिम्मत नहीं करती.

इसी डर की बदौलत पुलिस फायरिंग में तीस से ज़्यादा लोग मारे जाते हैं, मगर कोई नहीं बोलता.

इसी डर की बदौलत गुंडे कॉलेज की मासूम लड़कियों के साथ खुली यौन हिंसा करते हैं और हमारा खून नहीं खौलता. यह जानते हुए कि वर्तमान शक्ति संतुलन के रहते, आरोपियों का बाल भी बांका नहीं होगा.

क्या ये हमारी ही बहन बेटियां नहीं हैं ?

आख़िर एक फर्जी डर की बदौलत, एक क़ौम के आत्म सम्मान को कितना नीचे गिराया जा सकता है?

Ashutosh Kumar

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  1. Great content! Super high-quality! Keep it up! 🙂

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