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तुम वो हो जो तुम सोचते हो।

इस वक़्त भारत में आरएसएस और बीजेपी की सत्ता नहीं है, झूठ की सत्ता है। भारतीय राष्ट्र का मुकाबला एक खतरनाक किस्म के झूठ से है। रोज सुबह के अखबार झूठ से भरे हैं और दिन भर चैनल झूठ परोसते हैं। पूरे भारत की सत्ता पर झूठ का कब्जा है।

जनता से कहा जा रहा है कि हम धर्म के नाम पर विभाजन नहीं कर रहे हैं, हम तो शरणार्थी हिंदुओं को नागरिकता दे रहे हैं। विपक्ष ने सबको बरगला दिया है।

अब यही कहना बाकी है कि देश दुनिया के सारे संविधान के जानकारों और पूरे देश की जनता पर कांग्रेस ने काला जादू कर दिया है।

इनसे कोई पूछे कि जब 5 धर्मों के लोगों को नागरिकता मिलेगी और मुस्लिम को नहीं मिलेगी तो इसका आधार धर्म नहीं है तो और क्या है?

कह रहे हैं कि 5 धर्म के लोगों को नागरिकता देंगे, एक को नहीं देंगे लेकिन यह धर्म के आधार पर नहीं है। जब धर्म के लोगों को ही नागरिक बनाना है तो आधार धार्मिक कैसे नहीं है?

कोई इनसे पूछे कि हर दशक में लोगों को भारत की नागरिकता दी गई, फिर आज अचानक इस विभाजनकारी, साम्प्रदायिक और मध्ययुगीन कानून की जरूरत क्या है? आडवाणी जी से ही पूछ लेते कि उन्हें पाकिस्तान से भारत आकर नागरिकता कैसे मिली?

आरएसएस के लोग अगर हिंदुओं का भला करने के लिए दुबले हुए जा रहे हैं तो श्रीलंका के तमिलों को क्यों छोड़ दिया गया है? क्या तमिल हिंदू नहीं हैं?

इस कानून का नागरिकता से कोई लेना देना नहीं है।आरएसएस का असली मकसद संविधान की उस शक्ति को खत्म करना है जो सबको बराबरी का अधिकार देती है। लेकिन धर्म के आधार पर देश बनाने का अंतिम खामियाजा हिंदुओं को भुगतना होगा, जैसे इस्लामिक देश बनने का अंतिम खामियाजा पाकिस्तान के मुसलमान भोग रहे हैं।

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